नई दिल्ली। गंगा दशहरा (ganga dushara) पहली जून को मनाया जाएगा। इस दिन गंगा के धरती पर अवतरण (ganga arrival) का दिन माना जाता है। गंगा को पृथ्वी पर उतारने के लिए राजा भगीरथ को श्रेय दिया जाता है। इसीलिए गंगा का एक नाम भागीरथी भी माना जाता है। हालांकि इस बार हरिद्वार (haridwar) या किसी भी गंगा के घाट तक जाना इतना आसान नहीं होगा, इसलिए घर में ही गंगा स्नान का फल मिल सकता है।


गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए किया था भागीरथ प्रयास
गंगा को यहां तक लाने के लिए राजा भगीरथ को कठिन तपस्या करनी पड़ी थी। इसीलिए बेहद कठिन कार्य करने को भगीरथ प्रयास भी कहा जाता है। अयोध्या के इक्ष्वाकु वंश में राजा दिलीप और अंशुमान के वंश में राजा भगीरथ का जन्म हुआ था। अपने ही वंश के राजा सगर के पुत्रों के उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर लाने की शपथ ली थी। राजा भगीरथ से पहले अंशुमान, दिलीप इसी तपस्या को करते-करते अपना शरीर त्याग कर चुके थे।


भागीरथ ने उतारी थी गंगा की सात धाराएं
इसके बाद भी राजा भगीरथ ने ये तपस्या नहीं छोड़ी। उनका कोई वंशज भी शेष नहीं था। अपना राज-पाठ मंत्रियों को सौंप कर भगीरथ इस तप में लग गए। जब उनकी तपस्या से खुश होकर ब्रह्मा वर देने के लिए आए तो भगीरथ ने गंगा के अलावा एक पुत्र भी मांगा था। गंगा का वेग सहन करने के लिए राजा भगीरथ ने भगवान शिव की तपस्या की। इसीलिए भगवान भोलेनाथ की जटाओं में गंगा निवास करती हैं। यहां से गंगा जी की सात धाराएं निकली थी। इनमें से ह्लादिनी, पावनी और नलिनी पूर्व दिशा में सुचक्षु, सीता और महानदी सिंधु पश्चिम में बही थी।


गंगा की सातवी धारा को भगीरथ अपने साथ ले आए
सातवीं धारा को राजा भगीरथ अपने साथ ले आए और वो भागीरथी या गंगा कहलाई। इसी बीच जह्नमुनि की यज्ञशाला गंगा के प्रवाह से बहने लगा तो गुस्से में मुनि ने पूरी गंगा को पी कर खत्म कर दिया। देवताओं की आराधना से प्रसन्न होकर जह्नमुनि ने गंगा को अपनी पुत्री मानकर अपने कानों से बहने का स्थान दिया। इसीलिए गंगा को जाह्नवी भी कहा गया है। यहीं पर रास्ते में गंगा ने भगीरथ के पितरों की भस्म को मोक्ष दिलवाने के लिए कपिल मुनि के आश्रम से रास्ता बनाया।


अगर गंगा स्नान के लिए नहीं जा सकते तो ऐसे करें पुण्य लाभ
ज्योतिष आचार्य अरुणा दाधीच बताती हैं कि इस साल लोग गंगास्नान के लिए हरिद्वार या किसी गंगा किनारे पर नहीं पहुंच सकते हैं। मगर नहाने के पानी में ही बाल्टी में पानी डालने से पहले तीन ढक्कन गंगा जल डालकर गंगा स्नान की श्रद्धा से स्नान कर सकते हैं। शाम को गंगा स्नान के लिए दीपदान करने का विधान है। पद्म पुराण के उत्तर खंड में गंगा स्नान के विकल्प का जिक्र मिलता है। जो मनुष्य आंवले के फल और तुलसीदल से मिश्रित जल से स्नान करता है, उसे गंगा स्नान का फल मिलता है। इसके अलावा गंगा स्नान के फल के लिए एक मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। 'ॐ ह्रीं गंगायै ॐ ह्रीं स्वाहा' ये मन्त्र बोलते हुए स्नान करें तो गंगा स्नान का लाभ होता है | गंगा दशहरा के दिन इसका लाभ जरुर लें।