वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के मद्देनजर सामाजिक दूरी जैसे मानकों के कारण प्रतिबंधित की गई कांवड़ यात्रा के स्थान पर शिव भक्तों को उनके घर के पास ही गंगा जल उपलब्ध कराने के लिये उत्तराखंड सरकार तत्पर है। इसके लिये प्रदेश सरकार की ओर से पीतल के बड़े कलशों में हर की पौड़ी से गंगा जल भरकर संबंधित प्रदेशों को उपलब्ध कराया जाएगा।
शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने गुरूवार को संवाददाताओं को बताया कि श्रावण माह में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कांवड़ मेले को कोविड-19 के दृष्टिगत स्थगित किया जा रहा है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और हिमाचल के मुख्यमंत्रियों से मुख्यमंत्री की वार्ता हुई है। सभी ने वर्तमान संकट को ध्यान में रखते हुए इसके लिये सहमति जताई है। उन्होंने बताया कि कांवड़ के दृष्टिगत पड़ोसी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उप राज्यपालों एवं मंत्रिगणों के माध्यम से उनके प्रदेशों को गंगाजल उपलब्ध कराने का अभिनव प्रयास राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

कौशिक ने कुंभ मेला-2021 के सम्बंध में बताया कि राज्य सरकार मेले के सफल आयोजन हेतु प्रयासरत है। कुंभ का आयोजन निर्धारित समय अवधि में संपन्न हो इसके लिए सभी अखाड़ों की भी सहमति है। उन्होंने बताया कि कुंभ की व्यवस्थाओं के अंतर्गत किए जा रहे स्थाई प्रकृति के कार्यों को निर्धारित अवधि में पूर्ण करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हरिद्वार को जोड़ने वाले प्रमुख रास्तों, पुलों आदि के निर्माण, पुनर्निमार्ण के कार्य प्रगति पर हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सभी 13 अखाड़ों को उनके स्तर पर श्रद्धालुओं के लिए की जाने वाली आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु कुंभ मेला प्रयागराज की भांति यथासंभव आर्थिक सहयोग दिए जाने पर विचार कर रही है। इससे अखाड़ों को जन सुविधाओं व मूलभूत सुविधाओं के विकास में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि जिन अखाड़ों के पास अपनी भूमि उपलब्ध होगी उन्हीं को अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु धनराशि उपलब्ध करायी जायेगी। उन्होंने बताया कि अखाड़ों के अधीन होने वाले कायोर्ं के लिये कार्यदायी संस्था का भी निधार्रण शीघ्र किया जाएगा।

शासकीय प्रवक्ता के अनुसार कुंभ मेले के स्थायी प्रकृति के कार्यों की व्यापक समीक्षा के लिये मुख्यमंत्री द्वारा नगर विकास मंत्री, सचिव शहरी विकास एवं मेलाधिकारी की समिति गठित की है। समिति द्वारा कामों की नियमित समीक्षा की जाएगी। कुंभ के अंतर्गत किये जाने वाले अस्थायी निर्माण काम के सम्बन्ध में भी शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी छड़ी यात्रा का संचालन किया जाएगा। इसमें सीमित लोगों द्वारा प्रतिभाग किया जाएगा। यह यात्रा उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक एकता की प्रतीक है। उन्होंने कहा कि  परम्परानुसार जूना अखाड़े से पवित्र छड़ी यमुनोत्री, गंगोत्री होते हुए केदारनाथ और बदरीनाथ जाती है। बद्रीनाथ से यह छड़ी कुमाऊं मंडल के विभिन्न तीर्थ स्थलों से होते हुए वापस जूना अखाड़ा हरिद्वार पहुंचेगी और माया देवी मंदिर में प्रतिष्ठित की जाती है।
उन्होंने बताया कि हरिद्वार में चूंकि प्रति माह कोई न कोई आयोजन होता रहता है अत: अवस्थापना सुविधाओं के विकास से इसमें सुविधा होगी। हरिद्वार में आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों एवं आयोजनों में भले ही सीमित संख्या में श्रद्धालु आयें लेकिन आते जरूर हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार दर्शन सिंह रावत भी उपस्थित रहे।