भोपाल : राज्य शासन गौवंश के संरक्षण और संवर्द्धन के लिये पूर्णत: प्रतिबद्ध है। नि:शक्त, बेसहारा, वृद्ध और बीमार गौवंश को आश्रय देने के उद्देश्य से आगर-मालवा जिले के सालरिया गौ-अभ्यारण्‍य में लगभग 4 हजार गौवंश की देखभाल की जा रही है। गौ-अभ्यारण्‍य में सामान्य वार्षिक और मासिक मृत्यु दर भी कम है। किसी भी गौशाला की सामान्य वार्षिक मृत्यु दर 15 प्रतिशत और मासिक मृत्यु दर 1.25 है। इसके विरूद्ध अभ्यारण्‍य में वर्ष 2018 में वार्षिक मृत्यु दर 14.75 प्रतिशत मासिक मृत्यु दर 1.22, वर्ष 2019 में वार्षिक मृत्यु दर 14.60 और मासिक मृत्यु दर 1.21 और नवम्बर 2020 तक वार्षिक मृत्यु दर 13.25 और मासिक मृत्यु दर 1.10 प्रतिशत रही।

अभ्यारण्‍य में बहुत सा गौवंश पॉलिथीन खाने के कारण अति बीमार अवस्था में लाया जाता है। पशुपालन मंत्री श्री प्रेम सिंह पटेल ने लोगों से अपील की है कि पॉलिथीन का उचित स्थानों पर निष्पादन करें ताकि गाय इन्हें खाकर असमय मृत्यु का शिकार न हों।

छ: हजार गौवंश की क्षमता वाले गौ-अभ्यारण्‍य में अक्सर अति बीमार, वृद्ध और कमजोर गायों की आमद होती है। यहां पर पदस्थ 2 पशु चिकित्सक और 4 पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी इन गायों को बचाने के भरसक प्रयास करते हैं। गौवंश का स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और उपचार सतत् चलता रहता है। चिन्हांकन के लिये गौवंश को टेग भी लगाये गये हैं। गौ-अभ्यारण्‍य में हमेशा 15 दिन से 1 माह तक के भूसे का भण्डारण रहता है। इसके अलावा प्रत्येक गौवंश को साँची दुग्ध संघ का 'सुदाना' भी पौष्टिक आहार के रूप में दिया जाता है। परिसर में चारागाह होने के साथ हरा चारा भी उपलब्ध रहता है। बीमार, शिथिलांग और अंधी गायों के लिये अलग शेड है, जहां उनके उपचार और आहार की विशेष व्यवस्थाएं है।